बागपत। सनबीम पब्लिक स्कूल में आयोजित आर्य वीरांगना योग एवं चरित्र निर्माण शिविर के दूसरे दिन के कार्यक्रम में आचार्य डा.धीरज आर्य द्वारा यज्ञ के उपरांत शिक्षा विषय पर बताया गया कि सत्यार्थ प्रकाश द्वितीय समुल्लास में ऋषि दयानंद लिखते हैं कि मातृमान पितृमान आचार्यवान पुरुषो वेद अर्थात एक माता दूसरा पिता और तीसरा आचार्य होवे, तभी मनुष्य ज्ञानवान होता है।
वह कुल धन्य वह संतान बड़ा भाग्यवान जिस के माता और पिता धार्मिक विद्वान हो। जितना माता से संतानों को उपदेश और उपकार पहुंचता है,उतना किसी से नहीं। जैसा माता संतानों पर प्रेम, उनका हित करना चाहती है उतना अन्य कोई नहीं करता। बालकों को माता सदा उत्तम शिक्षा किया करें, जिससे संतान सभ्य हों और किसी अंग से कुचेष्टा न करने पावें। जब बालक 5 साल के हो तब देवनागरी अक्षर का ज्ञान करावें, उसके पश्चात जिनसे अच्छी शिक्षा, विद्या, धर्म, परमेश्वर, माता-पिता, आचार्य, विद्वान, अतिथि, राजा, प्रजा, कुटुंब, बन्धु, भगिनी, भृत्य आदि से कैसे कैसे वर्तना इन बातों के मंत्र, श्लोक, सूत्र, गद्य, पद्य अर्थ सहित कंठस्थ करावें, जिनसे संतान किसी धूर्त के बहकावे में ना आवे और जो विद्या धर्म विरुद्ध भ्रान्ति जाल में गिराने वाले व्यवहार हैं, उनका भी उपदेश कर दें, जिससे वे भूत-प्रेत आदि मिथ्या बातों पर विश्वास न करें।
इस दौरान बच्चों को विभिन्न योगासन सिखाये गये। कार्यक्रम में सनबीम पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य दीपेश जैन, प्रबंधक संजीव पंवार, आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत के प्रधान राजेंद्र आर्य, आर्यवीर दल संचालक यतेंद्र राणा, यशपाल आर्य, बाबूराम आर्य, विकास आर्य, व्यायाम शिक्षक जयराम आर्य आदि उपस्थित रहे।
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उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अमृत सरोवर के किनारे वृक्षारोपण भी होगा, बैठने के लिए बेंच भी लगायी जायेगी। उन्होने कहा कि लाईब्रेरी से भी बच्चे यहां आकर पढ़ सकते है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि एक रथ के दो पहिये होते है, एक समाज व दूसरा सरकार का। कोई भी चीज अगर बनायी जाती है तो उसको आप संभाल कर नहीं रखोगे तो वह सुरक्षित नहीं रहेगी। उसे सुरक्षित रखना हमारा धर्म ही नहीं हमारा कर्तव्य भी है। अपने लिए ही नहीं अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए भी अन्यथा हमारी आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेंगी।





कार्यक्रम की अध्यक्षता महेन्द्र कुमारी चौहान कार्यवाहक अध्यक्ष ने की। कार्यक्रम के संयोजक धीरेन्द्र सिंह चौहान रहे । अलका चौहान ने कहा कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। वीर योद्वा, वचन के पक्के, दुश्मन को भी सम्मान देने वाले, शब्दभेदी बाण में निपुण, अपनी आन बान देश के लिये बलिदान देने वाले, महिलाओं का सम्मान करने वाले राजा पृथ्वीराज चौहान का ऐसा व्यक्तित्व था।
स्वागत करने वालों में जिलाध्यक्ष सुधीर पंवार के नेतृत्व में कृपाल सिंह, मनीष पटेल, वीरेंद्र चौधरी, अलका पटेल, दीपा लोधी, चिरंजीव सैनी, सुनील गुप्ता, नीरज भारद्वाज, इमरान राणा, सुनील दत्त, रविंद्र कुमार, जहीर अहमद, चतरसैन आदि सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी जोन द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुये बताया कि हमें न केवल बड़े दिखने वाले पशु-पक्षियों अपितु सभी पक्षियों पर ध्यान देते हुये उनका संरक्षण करने के लिए कदम उठाने है। डा.विभाष पाण्डव ने अपने जीवन के कुछ अनछुए पहलुओ से अवगत कराते हुये सभी को स्वाम्प डियर आदि के लिए प्रोत्साहित किया। डा. रजत भार्गव ने पहाड़ी बया पक्षी के बारे में विस्तृत रूप से प्रजेन्टेशन के माध्यम से प्रस्तुतिकरण दिया। डा.आर.के.सिंह द्वारा मानव वन्य जीव द्वन्द के बारे में वनकर्मियों को किन-किन चीजों का ध्यान दिया जाना होता है,के सबंध में अवगत कराया।
