मसूरी (देहरादून)। देवभूमि उत्तराखंड में अवस्थित आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन द्वारा संचालित भगवान शंकर आश्रम परिसर में कार्तिक पूर्णिमा के उपलक्ष्य में हुआ दीक्षा महोत्सव।
अपने दीक्षा समारोह में देश और दुनिया से पहुँचें लोगों को उपदेशित करते हुए गुरुश्रेष्ठ ने स्पष्ट किया कि उन्होंने परम प्रज्ञ और परिमार्जित विशेष ज्ञान के प्रतीक मोरपंखी रॉयल ब्ल्यू रंग का चुनाव ही क्यों किया। गुरुदेव आर्यम जी ने बताया कि हमारे शरीर में ऊर्जा के सात पहिये हैं जिन्हें हम चक्र कहते हैं इनमें सर्वोच्च सहत्रार चक्र का रंग भी मोरपंखी नीला है। दीक्षा में चूँकि साधक का एक नया जन्म होता है और बिना बौद्धिक विकास के उसके पथभ्रष्ट होने की संभावना अधिक रहती है अतः यह रंग आत्मरूपांतरण में गेरुए से भी अधिक शुद्ध है। पूर्ववर्ती महान गुरुओं जिनमें गुरु गोरखनाथ और गुरु गोविंद सिंह जी का नाम प्रमुख हैं ने भी इस रंग का विशिष्ट प्रयोग किया था।

इस सुअवसर पर आर्यम गुरुगायत्री का भी लोकार्पण किया गया। देश विदेश से पधारे श्रद्धालाओं में से 35 नव दीक्षित, 38 मंत्र दीक्षित, एवं 110 लोगों ने शक्तिपात दीक्षा ली। जबकि पूर्ववर्ती दीक्षित संयोगियों ने शक्तिपात का अनुभव अर्जित किया। ज्ञात हो कि गुरुश्रेष्ठ आर्यम जी महाराज के पावन सानिध्य में हज़ारों हज़ार लोगों का जीवन तेज़ी से रूपांतरित हो रहा है। लोग पूर्ण समर्पण और श्रद्धा विश्वास से अपनी मूल जड़ों की और लौट रहे हैं। यज्ञ प्रार्थना हवन भजन और मंत्र सभी की जीवन शैली का अंग बन रहे हैं। लोगों का जीवन अधिक सफल, अधिक शांत अधिक समृद्ध और अधिक सुखी होता जा रहा है।
ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि देश विदेश में गुरुदेव आर्यम जी महाराज के सर्वाधिक दीक्षित शिष्य हैं, जो देश विदेश में विस्तारित हैं। उनके आध्यात्म का प्रकाश चहुं ओर फैल रहा है।
कार्यक्रम के आयोजन में माँ यामिनी श्री, श्वेता जायसवाल, शालिनी श्री, सुनील आर्य, प्रविंद्र, देवेंद्र, अविनाश जायसवाल, अक्षिता, अक्ष, जितेंद्र शर्मा, प्रीतेश आर्य, सरिता कृष्णे, हर्षिता आर्यम और रमन सिंह आदि का सहयोग रहा।





बैठक में संगठन के राष्ट्रीय महामन्त्री हरेंद्र सिंह, राष्ट्रीय संयोजक दयाचंद वर्क, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोज कलीना, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नरेश तोमर, प्रदेश कार्यकारिणी से धर्मपाल गिरी, विश्वबंधु शास्त्री आदि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए पत्रकारों की समस्याओं को उठाया एवं सभी को एकजुटता का परिचय देने के लिए निर्देशित किया, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रामटेक शर्मा को सभी अतिथियों ने सम्मानित किया, परिचय पत्र प्राप्त करने वाले सभी पत्रकारों ने शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।
बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष सुनील चौहान व संचालन जिला महामंत्री अनिल शर्मा ने किया।
शुक्रवार को छपरौली कस्बे के व्यापारियों ने कुलदीप सिंह सिरोही को सम्मानित कर नम आंखों से भावभीनी विदाई दी तो वहीं नवांगतुक थानाध्यक्ष देवेश शर्मा फूल माला व मिठाई खिलाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर व्यापार मंडल अध्यक्ष प्रमोद जैन ने कहा कि 11 महीने के कार्यकाल में थानाध्यक्ष कुलदीप सिंह सिरोही अपनी कार्यशैली से सबके प्रिय बन गए। इन्होंने दिखा दिया कि पुलिस व्यवस्था क्या होती है। जिनके रहते जहां अपराधियों की रूह कांपती थी वहीं आम जनमानस अपने आपको भयमुक्त महसूस कर रहा था। शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय की चली तबादला एक्सप्रेस में करीब एक दर्जन थानेदारों का स्थानांतरण इधर से उधर किया गया। नवांगतुक थानाध्यक्ष देवेश शर्मा ने कहा कि आगामी त्योहार के मध्य नजर कस्बे में फुट पेट्रोलिंग व वह थाने में आने वाले हर फरियादी की समस्याओं का निष्पक्ष रूप से निस्तारण किया जाएगा।
आर्यम जी महाराज ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात्रि को सोमरस की वर्षा होती है। यहां इसका अभिप्राय चंद्रमा की रश्मियों से है। ये रश्मियां औषधीय गुणों को लिए होती हैं जो हमारे मन मस्तिष्क को ऊर्जस्वित करती हैं। रात को अगर मिट्टी की हंडिया में खीर बनाकर रख दी जाए और प्रातःकाल उसका सेवन बच्चे एवं बड़े करें तो वह अत्यंत लाभकारी होती है।
ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि देश-विदेश में इस महत्वपूर्ण अवसर के मूल तत्व की पहचान करने वाले एकमात्र परमप्रज्ञ गुरुदेव श्री आर्यम ही हैं। साथ ही वे सभी ईश्वर के भक्तों को आह्वान करते हैं कि सभी वैदिक प्रार्थनाओं की ओर अग्रसारित हों और अपने आने वाली पीढ़ी के लिए केवल भौतिक चीजें ही छोड़कर न जाएं। संचित किए गए पुण्य एवं संस्कारों से भरी पोटली सदैव उनको ईश्वर कृपा में रखेंगी।


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एडीएम सुभाष सिंह ने दीप प्रवजलित कर किया। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के मानव संसाधन का नुकसान करती है। सीओ बड़ौत विजय चौधरी कहा सड़कों के नियमों का पालन करने का दायित्व प्रत्येक नागरिक का है। उन्होंने वाहन चलाते समय हेलमेट लगाना, मोबाइल का प्रयोग नही करना तथा शराब पीकर गाड़ी नही चलाने को लोगों जागरूक किया साथ ही रेड लाईट होने तथा ड्रिंक कर ड्राइव नही करने की सलाह दी। हिट एंड रन योजना की जानकारी दी। एआरटीओ राघवेंद्र सिंह ने सड़क सुरक्षा को लेकर प्रोजेक्टर पर लघु फ़िल्म दिखाई। कार्यक्रम में सड़क दुर्घटना में घयाल हुए अजय धामा खेकड़ा, सत्यपाल सिंह सिसाना को सम्मानित किया गया। स्कूल के बच्चों ने भी गीत व नाटिका के माध्यम से लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों के लिए जागरूक किया। इस दौरान अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा प्रचार वाहन को झंडी दिखाकर रवाना किया। चेयरमैन यतेश चौधरी प्रधानाचार्य मीनू सिरोही, उपप्रधानाचार्य डॉ. सुशील वत्स ने अधिकारियों का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में






ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि आर्यम जी महाराज ने पुष्पार्चन में शामिल होने वाले यूरोपियन श्रद्धालुओं को श्री गणेश चतुर्थी एवं ऋषि पंचमी के महत्व के बारे में बताया।उन्होंने बताया कि सप्तर्षि का अर्थ सात ऋषि , जो की वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज जी थे, जिन्हें ब्रह्मा जी का मानस पुत्र भी कहते है , को ईश्वर की वाणी वेद के प्रचार और प्रसार के लिए चुना गया। इन में से एक ऋषि विश्वामित्र जी ही गायत्री मंत्र का प्रादुर्भाव किया। प्राचीन धर्म ग्रंथ जैसे की ऋग्वेद की रचना में भी सप्तर्षि का विशेष योगदान रहा है। इस दिन को गुरु पंचमी भी कहते है, क्योंकि सप्तर्षि भी गुरु ही थे जो की किसी आत्मा रूपी मनुष्य को परमात्मा के समीप जाने का मार्ग बताते थे। गुरुदेव आर्यम जी ने बताया कि शिव सबके गुरु है , इसलिए ऋषि पंचमी को उनका पाठ करने से लाभ मिलता है।
गुरुदेव के आने की ख़ुशी में , भक्तों के अग्रह पर गुरुदेव ने पूजा के बाद उनके संस्मरण सुने और उनके प्रश्नों की जिज्ञासा भी शांत की। अनेक भारतवशीं जो अब यूरोप में बस गये हैं धीरे धीरे आश्रम गतिविधियों का हिस्सा बन रहे हैं।


विद्यालय के प्रधानाचार्य दिनेश कुमार शर्मा, रामनरेश शर्मा, मांगेलाल शर्मा एवं रुद्र प्रताप शास्त्री ने कहा कि इन सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से ही छात्रों का मानसिक, शारीरिक व संवेगात्मक विकास होता है और अपने गौरवशाली संस्कारों से परिचित होते हैं।
मसूरी(भारत) स्थित आर्यम मुख्यालय से गुरुदेव के साथ पधारी ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि भारतीयों के आराध्य भगवान शिव के प्रति समूचे विश्व में आस्था और लगाव निरंतर बढ़ रहा है। ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष प्रोफ़ेसर पुष्पेन्द्र कुमार आर्यम जी महाराज शिवरात्रि के अवसर पर आयोजित अनुष्ठान में यहाँ स्वयं पधारे। देवों के देव महादेव के निमित्त समस्त सत्रों के अनुष्ठान के प्रमुख गुरुदेव आर्यम रहे।
ज्ञातव्य हो कि आर्यम जी महाराज ने अपने पहले आश्रम की स्थापना मॉरीशस में वर्ष 2012 में की थी। तब वे यहाँ मॉरीशस सरकार के लिए संचार निदेशक के रूप में तीन साल के लिए नियुक्त हुए थे। पहले आश्रम का कामकाज श्रीएथनिक इंडिया ट्रस्ट चलाता था जिसका वर्ष 2023 में आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन में विलय कर दिया गया। अब सभी गतिविधियों का मुख्य केंद्र मसूरी उत्तराखण्ड (भारत) ही है।
मसूरी (देहरादून)। 20 जुलाई ,देवभूमि उत्तराखंड अवस्थित आर्यम इंटरनेशनल फाउंडेशन, भारत के तत्त्वावधान में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव भगवान शंकर आश्रम परिसर में प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मेरा पौधा, मेरा जीवन, मेरे संग अभियान के अंतर्गत 700 व्यक्तियों ने विभिन्न प्रजाति के 700 पौधों को गोद लिया। समारोह के द्वितीय सत्र में आर्यम दीक्षा प्रकल्प के अंतर्गत 182 को नव दीक्षा, 70 को मंत्र दीक्षा, एवं 158 को शक्तिपात दीक्षित किया गया।
ट्रस्ट की अधिशासी प्रवक्ता माँ यामिनी श्री ने बताया कि मसूरी स्थित आश्रम में गुरुदेव के सान्निध्य में दो दिवसीय गुरु पूर्णिमा का आरंभ हुआ। जिसमें आज के सत्रों में प्रकृति संरक्षण, वृक्षारोपण संकल्प, नव दीक्षा, मंत्र दीक्षा, शक्तिपात सत्रों का आयोजन किया गया।
उपस्थित शिष्यों ने सभी प्रकार के दुर्व्यसन एवं कुरीतियाँ से बचते हुए आर्यम प्रकल्प के साथ जुड़कर अपने जीवन के उच्चतम संकल्प को दोहराया।
आर्यम जी महाराज ने कामख्या में आयोजित होने वाले अम्बुवाची पर्व के बारे में अपने शिष्यों को पूर्ण जानकारी दी। अनुष्ठान के बाद भोजन प्रसादम की व्यवस्था आश्रम की ओर से की गई। गुरुदेव आर्यम जी महाराज अपने शिष्यों को अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में भी अपने घरों में स्वयं अपने आचार्य बनकर परमार्थ के रास्ते पर निरंतर चलते रहने हेतु प्रेरित करते हैं।

आश्रम द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी रुद्राक्ष, बिल्वपत्र एवं कपूर के पौधें इच्छुक लोगों को उनके घरों पर लगाने के लिए गमले में लगाकर निःशुक्ल प्रदान किए जा रहे हैं। आश्रम द्वारा संचालित गुरुदेव श्री आर्यम जी महाराज के इस अभियान में ज्ञान सिंह तोमर, पूरण सिंह रावत (वन दारोगा) राहुल सिंह चौहान, हरेंद्र सिंह(वन आरक्षी), भीम सिंह रावत, सुनील कुमार आर्य, राकेश रघुवंशी, संध्या रघुवंशी, हरमन सिंह बग्गा के अलावा आश्रम प्रबंधन की ओर से उत्कर्ष सिंह, प्रतिभा आर्य, रमन सिंह, हर्षिता आर्यम आदि का सहयोग रहा।






