Saturday, June 3, 2023

मोबाइल की लत बच्चों के लिए नुकसानदायक इसीलिए अभिभावक दे ध्यान, जाने उनकी दिनचर्या : सुशील वत्स

Must read

वरिष्ठ उपनिरीक्षक धर्मसिंह सहित 52 ने किया रक्तदान

ब्यूरो चीफ, विकास बड़गुर्जर बिनौली: सर्व हितकरी इंटर कॉलेज बिनौली में शनिवार को लिटिल स्टार चैरिटेबिल ब्लड बैंक मेरठ के सौजन्य से रक्तदान शिविर का...

मिशन लाइफ: नेहरू युवा केंद्र बागपत की टीम ने योगाभ्यास और साइक्लिंग कर दिया स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश

मिशन लाइफ के अंतर्गत योग सत्र और विश्व साइकिल दिवस का आयोजन, उत्साह के साथ युवाओं ने किया प्रतिभाग ब्यूरो चीफ, विकास बड़गुर्जर बागपत। युवा...

नेहरू युवा केंद्र बागपत ने मिशन लाइफ के अंतर्गत किया मिलेट्स मेले का शुभारंभ

मिलेट्स मेले में प्रदर्शनी, संगोष्ठी और शपथ दिलाकर लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए किया प्रेरित मिलेट्स मेले में लोगों ने चखे...

उड़ीसा का हादसा रेलवे विभाग की घोर लापरवाही, केंद्रीय रेल मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए

ब्यूरो चीफ, विकास बड़गुर्जर बिनौली: रालोद खेल प्रकोष्ठ राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ.नीरपाल सिंह ने कहा कि उड़ीसा के बालासोर में हुआ रेल हादसा रेलवे विभाग की...

कोरोना ने हमारी जिंदगी को बदल दिया यह कहना तार्किक होगा। एक बड़ा बदलाव पूरी दुनिया में देखने को मिला। लोगों ने एक दूसरे से मिलना बंद कर दिया, खुद को घर में बंद कर लिया था, यह समय की मांग थी क्योंकि संक्रमण तेजी से बढ़ रहा था। नुकसान स्कूली बच्चों को झेलना पड़ा था, उन्हें गर्मियों की छुट्टियों का इंतजार नहीं करना पड़ा।
मार्च से ही उन्हें छुट्टी हो जैसा माहौल मिल गया नुकसान पढ़ाई का हुआ उनके लिए कक्षाएं लेने का जरिया मोबाइल बन गया। रोजाना 3 से 4 घंटे हर बच्चे ने मोबाइल पर वक्त बिताया, लगातार 2 साल तक यही हाल रहा यह स्थिति बच्चों की आदत में ढल गई जो संक्रमण कम होने के बाद भी नहीं छूटे।
जिन बच्चों की आंखें अच्छी थी वह कमजोर हो गई आंखों में तिरछापन आ गया। बच्चों ने मोबाइल चलाने के लिए अपने अभिभावकों से झूठ बोलना शुरु कर दिया। जबकि अब तो ऑनलाइन कक्षाएं पूरी तरह से बंद हो चुकी है, बावजूद उसके बच्चे अपने अभिभावकों से मोबाइल चलाने के नाम पर यही कहते हैं कि वह स्कूल का काम कर रहे हैं। अभिभावक वास्तविकता से परिचित नहीं है, लेकिन चाहते हुए भी ज्यादा नहीं बोल पा रहे।

मोबाइल की लत बच्चों के लिए नुकसानदायक इसीलिए अभिभावक दे ध्यान: सुशील वत्स

करोना काल में कई बच्चों के फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अकाउंट बने इस बीच अभिभावकों ने भी ध्यान नहीं दिया। वास्तव में यह स्थिति खतरे को आमंत्रित करती है, क्योंकि ऑनलाइन ठगी करने वाले ठग भी इसी समय में तेजी से सक्रिय हुए।
मोबाइल की लत छोटे-छोटे बच्चों की मानसिक स्थिति को बयां कर रही है, रात भर बच्चों का सोशल साइट्स पर इस तरीके से एक्टिव रहना खतरे की घंटी है। आज हर परिवार का बच्चा सोशल साइट की गतिविधियों में व्यस्त है, आखिरकार मोबाइल बच्चों के लिए क्यों जरूरी है इस सवाल का जवाब भी अभिभावकों को खुद ही देना होगा, अगर बच्चे अभिभावकों का मोबाइल चलाते हैं तो क्यों? बच्चे अगर अपने अभिभावकों से किसी बात की जिद करते हैं तो अभिभावकों को उन्हें समझाना चाहिए, न कि उनकी जिद को पूरा करना। कई बच्चे बड़े होकर सिर्फ अभिभावकों के ठीक से ध्यान न देने की वजह से बिगड़ते हैं, बच्चे स्कूलों के दिनों में कुछ ही घंटे बिताते हैं, शिक्षक बच्चों के सर्वागीण विकास की तरफ ध्यान देते हैं। लेकिन इसे आगे बढ़ाने का कार्य भी अभिभावकों को करना होगा।
मोबाइल की लत बच्चों के लिए नुकसानदायक है। मोबाइल की स्क्रीन पर उपलब्ध प्लेटफार्म बच्चों को अच्छाई के साथ बुराई की तरफ ले जाते हैं।

Latest News